शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

Bitcoin Mining Kya Hai ?

बिटकॉइन माइनिंग क्या है ? 

  हेलो दोस्तों, आप सभी पाठकों का मेरे इस साइट Hindi Tech Nature में स्वागत् है. पिछले पोस्ट में हमने जाना कि 'बिटकॉइन क्या है? इसे कैसे उपयोग करते हैं और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में. आज के इस पोस्ट में बिटकॉइन माइनिंग क्या है? इसके बारे में जानेंगे, तो चलिए जानते हैं...

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Bitcoin Mining Kya Hai ?

  Mining के बारे में जानने से पहले आप यह जान लें कि हर Country में नोट छापने की एक Limitation होती है उसी तरह बिटकॉइन बनाने की भी एक Limitation है और Limitaion यह है कि मार्केट में 21 Million से ज्यादा बिटकॉइन नहीं आ सकते और अगर हम अभी की बात करें तो मार्केट में लगभग 13 Million बिटकॉइन है तो नये बिटकॉइन है वो Mining के जरिये आते हैं. बिटकॉइन माइनिंग के द्वारा कमाया जाता है।

  आमतौर पर माइनिंग से आशय सोना, कोयला या अन्य खनिजों के खनन कार्य से लगाया जाता है चूँकि बिटकॉइन का भौतिक स्वरूप तो है नहीं इसलिए इसकी माइनिंग परम्परागत तरीके से नहीं हो सकती. बिटकॉइन एक डिजिटल करेंसी होने के कारण इसका लेन-देन ऑनलाइन ही किया जा सकता है. बिटकॉइन माइनिंग का आशय नये बिटकॉइन के निर्माण की प्रक्रिया से है. नये बिटकॉइन का निर्माण जो कि सिर्फ कंप्यूटर द्वारा ही किया जाना संभव है, माइनिंग कहलाता है।

  बिटकॉइन माइनिंग एक ऐसा Process है जिसमें कंप्यूटिंग पॉवर का इस्तेमाल कर Transaction प्रोसेस किया जाता है. बिटकॉइन के पब्लिक लेजर (बही खाता) में किसी Transaction को अपडेट करने की प्रक्रिया है. नेटवर्क को सुरक्षित रखा जाता है. बिटकॉइन ऑनलाइन पेमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाता है जब कोई बिटकॉइन से पेमेंट करता है तो इस प्रोसेस को Verify किया जाता है जो इसे Verify करते हैं उन्हें Miners कहा जाता है जिनके पास Special Hardware यानि कि High Power Computer होते हैं इसके अलावा Mining Software की आवश्यकता होती है, और जो वे इन पॉवरफुल कंप्यूटर से, जिनकी प्रोसेसिंग तीव्र होती है, Bitcoin Transaction को Verify करते हैं।

 Miners कौन होते हैं ? 

  माइनर्स वो होते हैं जो माइनिंग का कार्य करते हैं अर्थात् जो बिटकॉइन बनाते हैं, अकेला एक इंसान माइनिंग को कंट्रोल नहीं कर सकता. बिटकॉइन माइनिंग में माइनर्स द्वारा Transaction प्रोसेस को Complete करने पर उन्हें ट्रांजेक्शन फीस मिलती है और यह ट्रांजेक्शन फीस बिटकॉइन के रूप में होती है। माइनर्स क्या वेरीफाई करते हैं? जब हम किसी से बिटकॉइन लेते हैं तो इसमें कोई किसी प्रकार का हेराफेरी या Cheating तो नहीं की गई है, Verify करने पर रिवार्ड के तौर पर उन्हें नये बिटकॉइन मिलते हैं तो इस तरह मार्केट में नये बिटकॉइन आते हैं।

  जब कोई बिटकॉइन से पेमेंट करता है तो प्रत्येक नये ट्रांजेक्शन को कंफर्म होने के लिए उन्हें Block में शामिल करना पड़ता है उसके साथ ही कुछ गणित (Maths) की प्रॉब्लम होती है जिन्हें कि Solve करना पड़ता है जो कि बहुत कठिन होती है जिसकी पुष्टि करानी होती है, प्रुफ करने के लिए आपको लाखों कैलकुलेशन प्रति सेकण्ड करनी होती है उसके बाद ही ट्रांजेक्शन कंफर्म होगा।

  हमारे इस नेटवर्क में जैसे2 Miners जुड़ेंगे तो उन्हें माइनिंग करने के लिए रिक्त ब्लॉक खोजने का तरीका और भी कठिन हो जायेगा।

  माइनिंग का कार्य वही लोग करते हैं जिनके पास तीव्र प्रोसेसिंग वाला शक्तिशाली कंप्यूटर हो और गणना करने की उचित क्षमता हो ऐसा नहीं होने पर माइनर्स केवल इलेक्ट्रिसिटी ही खर्च करेगा और अपना समय बर्बाद करेगा।

  इस माइनिंग प्रक्रिया से bitcoin प्राप्त करने के अलावा आप इसे मुद्रा विनिमय, ऑनलाइन गेम्स, प्रोडक्ट्स और सेवाओं की बिक्री के बदले भी प्राप्त कर सकते हैं।

 माइनिंग का उद्देश्य :- 

  Bitcoin के माइनिंग का मुख्य उद्देश्य है bitcoin नोड्स को एक सुरक्षित, फिशिंग एवं छेड़छाड़ रहित अनुमति प्रदान करना। माइनिंग भी एक ऐसा मेकेनिज्म है जो bitcoin को सिस्टम में लाँच करता है. माइनर्स को माइनिंग के एवज में फीस भी मिलती है और साथ ही साथ नये बिटकॉइन हेतु 'सब्सिडी' भी मिलती है।


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